Bhukh Samwad, Best lines on Lockdown,Best Drama

     भूख संवाद, Bhukh Samwad


                                                                                                       

                                                                               

दोस्तों यह एक नाटक के रूप में है, यह एक बहुत ही गरीब परिवार के पति पत्नी के बिच का संवाद (बातचीत) है, जिससे आप ध्यान से पढेंगे तो आपको जरुर अच्छा लगेगा, आपकों थोड़ी परेशानी हो सकती है क्युकी यह एक लोक भाषा में है| क्युकि इस भाषा में ही भाव आता है|, परन्तु अगर आप ध्यान से पढेंगे तो आप जरुर इसके भाव को समझ पायंगे |
बाकी विशेस बात हम इस पोस्ट के अन्त में करेंगे, तो अगर आप इस्से पढ़ रहे थे तो पोस्ट के अन्त में भी जरुर पढियेगा |


                                                           भूख संवाद 
 

पत्नी - सुना है नई बीमारी आई है?
पति -हा , बीमारी तो आई है
पत्नी -कैसी बीमारी है ज्यादा खतरनाक है क्या ?
पति -कह तो रहे है लोग
पत्नी -ओ पत्नी-आपका कमपनी कब तक खुलेगा
पति -देखो कब खुलता है मालिक मना कर दिए की २० (20) दिन बाद आना
पत्नी -20 दिन! काहे जी उ बीमारिया आपके कंपनी में भी किसी को हो गया है क्या ?
पति - ना ! उ तो जहाह से विदेश आये जाये वाला के होता है ऐसा सुने है
पत्नी -तब फिर आपका कंपनी कहे बंद है ?
पति -सरकार कहिन मालिक के तो मालिक बंद कर दिए
पति -उ सब छोडो खाय ला दो
पत्नी -खानवा तो खत्म हो गया जी! बढ्का खाया है और छोटका आधे पेट खाया तो पानी पिला कर सुता दिए 
पति - ओ ! तुहू नही खायी है ?
पत्नी -हमको भूख न लागल है
पति -न काहे लागल है जा रहे है खाना बटता है वही से आयंगे खा लेना
पत्नी -रहे दीजिये इत्ता धुप में भूखे कहा जाइयेगा
पति -तुम चुप रहो तुमको कुछ बुझाता है, जा रहे है, गमछी लाओ बांध लेंगे

                                                          एक घंटा बाद

पत्नी -आ गये जी ?
पति -हा, ई  लो एक पैकेट मिला तुम खा लो और छोटका के भी खिया देना
पत्नी -आरे तो 2 पैकेट मांग लेते आप भी तो नहिये खाए है
पति -आरे 2 पैकेट लिए थे ! तो खानवे ख़त्म हो गया और मंगरू के माई के न मिला वो दो लोग भूखे रह जाते तो उन्ही के एक पैकेट दे दिए
पत्नी -आपको तो दान दछिना करे से फुर्सते नही रहता है
पति-आरे तो का करते उनका बेटा दिल्ली में फसल है उ दू लोग अकेले है न मिला तो दे दिए
पत्नी -दे तो दिए तो खैयेगा कोच्ची?
पति-तुम खालो हम रतिया में खा लेंगे
पत्नी -ये लीजिये बाबु ला निकाल दिए, इतना में आप भी खा लीजिये |
पति-ठीक खाओ |
पत्नी -हु |
पत्नी- खाइए न जी सब हमार देने करले है
पति- खाओ हम खा लिए |
पत्नी -अब का कीजियेगा जी रासन ला पैसा बच रहा है न !
पति-पैसा कहा बच रहा पिछले रासन में ख़त्म हो गया |
पत्नी -ख़त्म हो गया ! अब का कीजियेगा जी |
पत्नी -जाइये मालिक से 10 दिन के मजदूरी मांग लीजिये फिर बाद में काम कर दीजियेगा |
पति-मांगे थे मालिक मना कर दिए की पैसा नही है |
पत्नी -आपका मालिक भी वैसने है |
पत्नी-आपको कहते थे न की मालिक के यहाँ हमको काम करे ला हमको नोकरी लगवा दीजिये |, कुछ पैसा बनता न
पति -आरे उनके यहाँ सिर्फ सहर से ट्रेंनिंग करे वाला के नौकरी लगता है तो
पत्नी-चिंता मत कीजिये हमको जो नईहर से कानबाली मिला था न टूट गया है उसको जाकर सुनार के पास बेच दीजिये कुछ दिन का रासन आ जायगा |
पति -सुनार के दुकान कहा खुलल है की बेच देंगे |
पत्नी-तो अब क्या कीजियेगा जी
पति -आब तो जे करेंगे राम ही करेंगे |

                                                                                                    लेखक - नीरज आर्या                             
                                                                                                                                                            समाप्त




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Now in HINGLISH
                               
                                                         Bhukh Samwad


Patni - Suna hai nyi Bimari aayi hai.
Pati -Ha Bimari to aayi hai.
Patni -Kaisi Bimari hai jyada khatarnak hai kya?
Pati -Keh to rahe hai log.
Patni -oo...
Patni -Aapka Comapany kab tak khulega?
Pati -Dekho kab khulta hai Malik mnna kar diye ki 20 din baad aana.
Patni -20 din! kahe ji uu Bimariya aapke company me bhi kisiko ho gya hai kya?
Pati -Nah! uu toh jahaj se videsh aaye jaye wala ke hota hai aisa sune hai.
Patni -Tab fir aapka company kahe band hai?
Pati -Sarkar kahin malik ke to malik band kar diye.
Pati -Uu sab chhodo khay la do.
Patni -Khanwa to khatm ho gya ji Badhka khaya aur chhotka aadhe pet khaya to pani piya ke suta diye.
Pati -Ooo.. Tuhu nhi khai hai?
Patni -Humko bhukh na lagal hai.
Pati -Na kahe lagal hai., Ja rhe hai khhana batata hai wahi se le aaynge khaa lena
Patni -Rahe dijiye itta dhup me bhukhe kaha jaiyega.
Pati -Tum chup rho, tumko kuchh bujhata hai,ja rhe hai gamchhi do bandh lenge.



                                                      ONE HOUR LATER


Patni -Aa gye ji?
Pati - Ha ii lo ek packet mila tum khha lo aur chhotka ke bhi khiya dena.
Patni -Aare toh 2 packet mang lete aap bhi to nhiye khaye hai.
Pati - Aare 2 packet liye thhe to khanwe khatm ho gya, aur Mangru ke maii ke na mila wo 2 log bhukhe rah jate to unhi ke 1 packet de diye.
Patni -Aapko to daan dachhina kare se fursate nhi rahta hai.
Pati -Aare to kaa karte unka beta Delhi me fasal hai, na mila, toh de diye.
Patni -De toh diye toh khaiyega kochi?
Pati -Tum khha lo hum ratiya me khha lenge.
Patni -Ye lijiye babu la nikal diye, itna me aap bhi khha lijiye.
Pati -Thik khao.
Patni -Hu
Patni -Khaiye na ji sab hmar dene karle hai
Pati -Khao hum khaa liye.
Patni -Aab ka kijiyega ji rasan la paisa bach rha hai n?
Pati -Paisa kaha bach rha pichhle rasn me sab khatam ho gya.
Patni -Khatam ho gya! Aab ka kijiyega ji, jaiye malik se 10 din ke majduri mang lijiye baad me kam kar dijiyega
Pati -Mange thhe malik mna kar diye, Paisa nhi hai.
Patni -Aapka malik bhi waisne hai.
Patni -Aapko kehte thhe na ki malik ke yaha humko kaam krela humko naukri lagwa dijiye, kuchh paisa banta na.
Pati -Aare unke yaha sirf sahr se training kre wala ke naukri lagta hai to.
Patni -Chinta mat kijiye jo humko naihar se kanbali mila thaa n, tut gya hai jaiye sunar ke pass bech dijiye kuchh din ka rasan aa jayga.
Pati -Sunar ke dukan kaha khulal hai ki bech de.
Patni -Toh aab ka kijiyega ji?
Pati-Aab to je krenge Ram hi krenge.
   
                                                                                                                           writter- Niraj Aarya
    The End                                                                                                                                       


                                                             नाटक के बारे में
दोस्तों इस नाटक में एक छोटे से गरीब परिवार के बिच संकट का सामना करते हुए प्रेम की अतुल्य उदाहरण देने की कोशिस की गयी है | इसमें दर्शाया गया है की वो लोग कठिन संकट में होने के बावजूद न तो एक दुसरे का साथ छोड़ते है न ही मदद का हाथ बढाने से कतराते है | और सबसे प्रसंसनीय यह है की साथ मिलकर मुश्किल से मुश्किल प्रस्थिति से सामना करने का साहस जुटाते है |
दोस्तों हम सब इस बीमारी से लड़ रहे है|, इसके लिए तालाबंदी का पालन कर रहे है | लेकिन इसकी मार उन गरीबो पर ज्यादा पढ़ रही है | यह भी एक बात इसमें दर्शाया गया है | दोस्तों मेरी आप से एक ही गुजरिश है की अगर आप किसी का सहायता करने के लिए समर्थ है तो जरुर करे | अगर आप यह तक पढ़ रहे थे तो पहले तो बहुत बहुत धन्यवाद् और एक गुजरिश की Comment Section में अपना विचार जरुर प्रकट करे |


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दोस्तों  जब भी  समाज की बात आती  है  तो कहा  जाता  है  की  अगर  कुछ  हुआ तो समाज आपके साथ खड़ा होगा , समाज  आपका  साथ  देगा ,
तो  क्या  सच में  दोस्तों  समाज  साथ देती है क्या ?

आज लोगो के मन में नफरत की बिज बोती  है समाज 
आज लोगो को लड्वती है समाज 
कभी धर्मं के नाम पर , कभी जाती के नाम पर,
कभी मंदिर, मस्जिद, गाय के नाम पर ,
आज अन्याय होता देख कर नजरे चुराती है समाज 
आज क्रोध को उकसाती है समाज 
भीड़ को दंगा बनती है समाज 
आज प्रेमियों को चौराहे पे लटकाती है समाज 
आज किसी बेटी को उसके बाप से प्रेम की सजा मौत दिलाती है समाज 

                                                                                                                To read full article click here.

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