Samaj hi samadhan ya samasya Hindi poetry,Best poetry हिन्दी कविता

समाज ही समाधान या  समस्या




आज की  पहली  कविता है जिसका सीर्सक है समाज ही समाधान या समस्या


दोस्तों  जब भी  समाज की बात आती  है  तो कहा  जाता  है  की  अगर  कुछ  हुआ तो समाज आपके साथ खड़ा होगा , समाज  आपका  साथ  देगा ,
तो  क्या  सच में  दोस्तों  समाज  साथ देती है क्या ?
समाज  हमारे  लिए  समाधान निकालती है या और समस्या ही पैदा कर देती है ?
इन्ही  सब सवालो  के साथ मै अपनी  कविता  लेकर आया हु |
गौर फरमैयेगा


                                              

समाज ही समाधान या  समस्या


मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है , ऐसा कहा जाता है 
परन्तु प्राणी है या पत्थर  इसका  निर्णय अभी न हो सका |

समाज की परिभाषा कहती है की 
लोगो का समूह जिनके विचार विभिन होने के बावजूद एकमत होते है 
सब लोगो का साथ दे ती है समाज 
बेआवाजो को आवाज देती है समाज 
बेसहारो का सहारा बनती है समाज 
बेघर को आश्रय  देती है समाज 
हरे हुए की आसा  बनती है समाज 
लहरों में भटके हुए की किनारा बनती है समाज 

लेकिन ये तो महेज परिभाषा है 
हकीकत क्या है ?

आज लोगो के मन में नफरत की बिज बोती  है समाज 
आज लोगो को लड्वती है समाज 
कभी धर्मं के नाम पर , कभी जाती के नाम पर,
कभी मंदिर, मस्जिद, गाय के नाम पर ,
आज अन्याय होता देख कर नजरे चुराती है समाज 
आज क्रोध को उकसाती है समाज 
भीड़ को दंगा बनती है समाज 
आज प्रेमियों को चौराहे पे लटकाती है समाज 
आज किसी बेटी को उसके बाप से प्रेम की सजा मौत दिलाती है समाज 
आज सिर्फ खौफ और डर दिखाती है समाज 
आज कई मासूमो का कातिल है समाज 
फिर भी समाज से निकाल दिए जाने की धमकी देता है समाज 
निकाल दो , मुझे नही बनना वो समाज जिसके बारे में लोग कहते है 
समाज क्या कहेगा 
समाज क्या कहेगा
अन्त में  मै यही कहूँगा 
हे भगवान हे गॉड हे खुदा हे मौला 
तू फिर से इस धरती पे आवतार ले 
और इस जुल्मी समाज को सुधार दे -2

लेखक - नीरज आर्या 


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                   SAMAJ HI SAMADHAN YA SAMASYA




MANUSYA EK SAMAJIK PRANI HAI AISA KAHA JATA HAI
SAMAJIK TO HAI PRANTU PRANI HAI YA PATHAR ISKA NIRNAY ABHI NA HO SAKA

ARIBHASA KEHTI HAI KI
LOGO KA SAMUH JINKE VICHAR VIBHINN HONE KE BAWJOOD EKMAT HO
SAB LOGO KA SATH DETI HAI SAMAJ
BEAWAJO KO AAWAJ DETI HAI SAMAJ
BESAHARO KA SAHARA BANTI HAI SAMAJ
BEGHAR KO AASRAYA DETI HAI SAMAJ
HAARE HUE KI AASA BANTI HAI SAMAJ
LAHRO ME BHATKE HUE KI KINARA BANTI HAI SAMAJ

LEKIN YE TO MAHEJ PARIBHASA HAI
HAKIKAT KYA HAI?

AAJ LOGO KE MNN ME NAFRAT KA BIJ BOTI HAI SAMAJ
AAJ LOGO KO LADWATI HAI HAI SAMAJ
KABHI DHARM KE NAAM PAR, KABHI JATI KE NAAM PAR
KABHI MANDIR, MASJID, GAAY KE NAAM PAR
AAJ ANYAY HOTA DEKH KAR NAJRE CHURATI HAI SAMAJ
AAJ KRODH KO UKSATI HAI SAMAJ
BHID KO DANGA BANATI HAI SAMAJ
AAJ PREMIYON KO CHAURAHE PE LATKATI HAI SAMAJ
AAJ KISI BETI KO USKE BAAP SE PREM KI SAZA MAUT DILATI HAI SAMAJ
AAJ SIRF KHAUF AUR DARR DIKHATI HAI SAMAJ
AAJ KAI MASUMO KA KATIL HAI SAMAJ
FIR BHI SAMAJ SE NIKAL DIYE JANE KI DHAMKI DETA HAI SAMAJ
NIKAL DO, MUJHE NHI BANANA WO SAMAJ JISKE BARE ME LOG KEHTE HAI
SAMAJ KYA KAHEGA
SAMAJ KYA KAHEGA
AANT ME MAI BSS YAHI KAHUNGA
HEY BHAGWAN, HEY GOD, HEY KHUDA, HEY MAULA
TU FIR SE ISS DHARTI PE AWTAR LE
AUR ISS JULMI SAMAJ KO SUDHAR DE-2

written by NIRAJ AARYA





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